![]() |
| Sanjeev Mehta |
ईस्ट इंडिया कंपनी की यात्रा वर्ष 1600 में शुरू हुई थी। तब उसकी शुरुआत ईस्ट इंडीज देशो के साथ व्यापार करने से हुई थी, पर धीरे-धीरे इसने खुद को भारतीय महाद्वीप और चीन पर केंद्रित कर लिया। यह शुरुआती दिनों में मसालों का व्यापार करती थी। इसी क्रम में इस कंपनी का जहाज वर्ष 1608 में भारत के सूरत बंदरगाह पर पहुँचा। जल्द ही इसने बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व बंदरगाह मछलीपट्टनम में पहला फैक्ट्री खोली।
इस ब्रिटिश कंपनी को डच और पुर्तगाली कंपनियों से भी मुकाबला करना पड़ा। वर्ष 1612 में पुर्तगालियों को ब्रिटिशो ने युद्ध मे मात दी। उसके बाद कंपनी को राजनीतिक अधिकार और अपने लिए जमीन की जरूरत महसूस हुई। ब्रिटिश शासक जेम्स प्रथम के निर्देश पर सर थामस ने मुगल शासक जहाँगीर से सूरत और अन्य क्षेत्रों में कंपनी की फैक्टरी स्थापित करने की गुजारिश की। अनुमति मिलते ही कंपनी ने सूरत और फिर इसके बाद मद्रास, बाम्बे और कलकत्ता में फैक्टरियां खोली।
व्यापार के रास्ते सत्ता तक पहुची इस कंपनी के पांव 1857 की क्रांति ने उखाड़ दिए। हालांकि तब भी यह चाय का व्यापार करती रही। पर 1874 में महारानी विक्टोरिया ने इसका राष्ट्रीयकरण कर इसे ब्रिटिश हुकूमत में शामिल कर लिया। वर्ष 1974 में कुछ निजी निवेशकों ने इस कंपनी में पूंजी लगाने की सोची। पर 2005 में भारतीय उद्योगपति संजीव मेहता ने इसका अधिग्रहण कर लिया। इस तरह जो ईस्ट इंडिया कंपनी कभी गुलाम का प्रतीक थी, वह आज हमारे वर्चस्व का उदाहरण बन गई हैं।
East India Company in Present Time
Reviewed by Akash
on
April 27, 2020
Rating:
Reviewed by Akash
on
April 27, 2020
Rating:

No comments: