देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों को भले ही रोहतांग दर्रे में प्राकृतिक कठिनाईयो में दो-चार होना पड़ता है, पर भौगोलिक रूप से समृद्ध यह दर्रा इतना खूबसूरत है कि यात्री खुद को वहाँ जाने से रोक नही पाते।पूर्वी पीर पंजाल पर्वत माला का यह क्षेत्र हिमालय का हिस्सा है, जो मनाली से 51 किलोमीटर दूर है और कुल्लू घाटी को हिमाचल प्रदेश की लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है।
प्राकृतिक रूप से यह इलाका जितना खूबसूरत है, धार्मिक नजरिये से उतना ही महत्वपूर्ण है। इस दर्रे
को बौद्ध और हिन्दू धर्मो का संगम कहे, तो अतिश्योक्ति नही। असल मे कुल्लू दक्षिणी के हिन्दुओ का धार्मिक स्थल है,। तो। लाहौल और स्पीति बौद्धों के लिए महत्वपूर्ण। लिहाज पर्यटकों का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक क्रियाकलापों के लिए भी यहाँ आता है। यह दर्रा चेनाब और व्यास नदियों की घाटियों को बड़ी खूबसूरती से बाटता हैं। इसके दक्षिणी हिस्से में व्यास नदी का उदगम स्थल है, तो उत्तरी हिस्से में चेनाब की स्त्रोत धारा चंद्रा नदी का बहाव।
रोहतांग दर्रा मई से नंबम्बर के बीच ही खोला जाता है। हालांकि हिमालय की यात्रा करने वालो के लिए इस राह से गुजरना मुश्किल नही, पर अनिश्चित बर्फवारी, भूस्खलन और तेज बारिश इस दर्रे की राह दुरूह करती है। रोहतांग व्यापार कें लिहाज से पीर पंजाल के बाशिंदों के लिए महत्वपूर्ण तो है ही, केंद्र सरकार के लिए भी यह सामरिक रूप से संवेदनशील है।
कारगिल युद्ध के बाद इसे वैकल्पिक सैन्य मार्ग के रूप में विकसित किया गया है। चूंकि सैनिको की आवाजाही भी गर्मी शुरू होते ही बढ़ जाती है, लिहाज सैन्य वाहनों की आवाजाही से इस दर्रे में जाम की समस्या बढ़ने लगी है। हालाँकि इससे पार पाने के लिए केंद्र सरकार ने रोहतांग सुरंग का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसका बजट 32 करोड़ डॉलर रखा गया है। यह सुरंग सैन्य बलो के साथ-साथ यात्रियों को भी सुरक्षित यात्रा प्रदान करेगी।
भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल सुरंग (जिसे रोहतांग सुरंग के नाम से जाना जाता था), लेह-मनाली राजमार्ग पर हिमालय की पूर्वी पीर पंजाल श्रेणी में रोहतांग दर्रे के नीचे एक राजमार्ग सुरंग बनाई जा रही है। 8.8 किमी (5.5 मील) की लंबाई पर, सुरंग भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक होगी और माना जाता है कि मनाली और केलांग के बीच की दूरी लगभग 46 किमी (28.6 मील) तक कम हो जाएगी। [2] सुरंग 3,100 मीटर (10,171 फीट) की ऊंचाई पर है जबकि रोहतांग दर्रा 3,978 मीटर (13,051 फीट) की ऊंचाई पर है। सुरंग की खुदाई अक्टूबर 2017 में पूरी हुई जब दक्षिण और उत्तरी छोर से ब्लास्टिंग हुई और जून 2020 में पूरी सुरंग खुल जाएगी।
लेह-मनाली राजमार्ग, लद्दाख के दो मार्गों में से एक, 2020 में सुरंग के माध्यम से भेजा जाएगा। रोहतांग दर्रा सर्दियों के महीनों के दौरान भारी बर्फबारी और बर्फानी तूफान प्राप्त करता है और सड़क यातायात के लिए एक वर्ष में केवल चार महीने खुला रहता है। सुरंग सर्दियों के दौरान राजमार्ग को खुला रखेगा। लेह का दूसरा मार्ग श्रीनगर-द्रास-कारगिल-लेह राजमार्ग पर ज़ोजी ला पास के माध्यम से है, जो एक वर्ष में लगभग चार महीनों तक बर्फ से अवरुद्ध हो जाता है। ज़ोजी ला पास के तहत 14 किमी लंबी सुरंग के निर्माण की योजना बनाई गई है। ये दो मार्ग अक्साई चिन और सियाचिन ग्लेशियर के सामने पश्चिम में सैन्य उप-क्षेत्र में सैन्य आपूर्ति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस अटल टनल का उद्घाटन प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया|
अटल सुरंग बिल्कुल रोहतांग पास के नीचे नहीं है; यह दर्रे से थोड़ा पश्चिम में है। दक्षिण प्रवेश द्वार धुसी के उत्तर में ब्यास नदी के दूसरी ओर 32.3642 ° N 77.130 ° E पर है। सुरंग का उत्तरी छोर 32.4388 ° उत्तर में तेलिंग गांव के पास मौजूदा लेह-मनाली राजमार्ग से मिलता है और 77.1642 ° पूर्व ग्राम्फ़ु के पश्चिम में लगभग 10 किमी पश्चिम में स्थित है, जो मौजूदा राजमार्ग पर रोहतांग दर्रा के बाद पहला गाँव है।
प्राकृतिक रूप से यह इलाका जितना खूबसूरत है, धार्मिक नजरिये से उतना ही महत्वपूर्ण है। इस दर्रे को बौद्ध और हिन्दू धर्मो का संगम कहे, तो अतिश्योक्ति नही। असल मे कुल्लू दक्षिणी के हिन्दुओ का धार्मिक स्थल है,। तो। लाहौल और स्पीति बौद्धों के लिए महत्वपूर्ण। लिहाज पर्यटकों का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक क्रियाकलापों के लिए भी यहाँ आता है। यह दर्रा चेनाब और व्यास नदियों की घाटियों को बड़ी खूबसूरती से बाटता हैं। इसके दक्षिणी हिस्से में व्यास नदी का उदगम स्थल है, तो उत्तरी हिस्से में चेनाब की स्त्रोत धारा चंद्रा नदी का बहाव।
रोहतांग दर्रा मई से नंबम्बर के बीच ही खोला जाता है। हालांकि हिमालय की यात्रा करने वालो के लिए इस राह से गुजरना मुश्किल नही, पर अनिश्चित बर्फवारी, भूस्खलन और तेज बारिश इस दर्रे की राह दुरूह करती है। रोहतांग व्यापार कें लिहाज से पीर पंजाल के बाशिंदों के लिए महत्वपूर्ण तो है ही, केंद्र सरकार के लिए भी यह सामरिक रूप से संवेदनशील है।
कारगिल युद्ध के बाद इसे वैकल्पिक सैन्य मार्ग के रूप में विकसित किया गया है। चूंकि सैनिको की आवाजाही भी गर्मी शुरू होते ही बढ़ जाती है, लिहाज सैन्य वाहनों की आवाजाही से इस दर्रे में जाम की समस्या बढ़ने लगी है। हालाँकि इससे पार पाने के लिए केंद्र सरकार ने रोहतांग सुरंग का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसका बजट 32 करोड़ डॉलर रखा गया है। यह सुरंग सैन्य बलो के साथ-साथ यात्रियों को भी सुरक्षित यात्रा प्रदान करेगी।
भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल सुरंग (जिसे रोहतांग सुरंग के नाम से जाना जाता था), लेह-मनाली राजमार्ग पर हिमालय की पूर्वी पीर पंजाल श्रेणी में रोहतांग दर्रे के नीचे एक राजमार्ग सुरंग बनाई जा रही है। 8.8 किमी (5.5 मील) की लंबाई पर, सुरंग भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक होगी और माना जाता है कि मनाली और केलांग के बीच की दूरी लगभग 46 किमी (28.6 मील) तक कम हो जाएगी। [2] सुरंग 3,100 मीटर (10,171 फीट) की ऊंचाई पर है जबकि रोहतांग दर्रा 3,978 मीटर (13,051 फीट) की ऊंचाई पर है। सुरंग की खुदाई अक्टूबर 2017 में पूरी हुई जब दक्षिण और उत्तरी छोर से ब्लास्टिंग हुई और जून 2020 में पूरी सुरंग खुल जाएगी।
लेह-मनाली राजमार्ग, लद्दाख के दो मार्गों में से एक, 2020 में सुरंग के माध्यम से भेजा जाएगा। रोहतांग दर्रा सर्दियों के महीनों के दौरान भारी बर्फबारी और बर्फानी तूफान प्राप्त करता है और सड़क यातायात के लिए एक वर्ष में केवल चार महीने खुला रहता है। सुरंग सर्दियों के दौरान राजमार्ग को खुला रखेगा। लेह का दूसरा मार्ग श्रीनगर-द्रास-कारगिल-लेह राजमार्ग पर ज़ोजी ला पास के माध्यम से है, जो एक वर्ष में लगभग चार महीनों तक बर्फ से अवरुद्ध हो जाता है। ज़ोजी ला पास के तहत 14 किमी लंबी सुरंग के निर्माण की योजना बनाई गई है। ये दो मार्ग अक्साई चिन और सियाचिन ग्लेशियर के सामने पश्चिम में सैन्य उप-क्षेत्र में सैन्य आपूर्ति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस अटल टनल का उद्घाटन प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया|
अटल सुरंग बिल्कुल रोहतांग पास के नीचे नहीं है; यह दर्रे से थोड़ा पश्चिम में है। दक्षिण प्रवेश द्वार धुसी के उत्तर में ब्यास नदी के दूसरी ओर 32.3642 ° N 77.130 ° E पर है। सुरंग का उत्तरी छोर 32.4388 ° उत्तर में तेलिंग गांव के पास मौजूदा लेह-मनाली राजमार्ग से मिलता है और 77.1642 ° पूर्व ग्राम्फ़ु के पश्चिम में लगभग 10 किमी पश्चिम में स्थित है, जो मौजूदा राजमार्ग पर रोहतांग दर्रा के बाद पहला गाँव है।
Rohtang Vale (Atal Tunnel)
Reviewed by Akash
on
April 27, 2020
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