RECENT COMMENTS

Shimla Agreement (शिमला समझौता)

       मुख्य कारण

                 भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध को मजबूत करने वाला शिमला समझौता अब 48वे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 2-3 जुलाई 1972 की आधी रात को करीब 12 बजकर 40 मिनट पर भारत के शिमला में एक संधि पर हस्ताक्षर हुए। इसे शिमला समझौता कहते हैं। इसमें भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान राष्ट्राध्यक्ष जुल्फिकार अली भुट्टो शामिल थे। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच दिसम्बर 1971 में हुई लड़ाई के बाद किया गया था, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान मतलब बांग्लादेश का निर्माण हुआ था और पाकिस्तान के 93,000 से अधिक सैनिकों ने अपने लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी के नेतृत्व में भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। यह समझौता करने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो अपनी पुत्री बेनज़ीर भुट्टो के साथ 28 जून 1972 को शिमला पधारे। ये वही भुट्टो थे, जिन्होंने घास की रोटी खाकर भी भारत से हजार साल तक जंग करने की कसमें खायी थीं। 28 जून से 1 जुलाई तक दोनों पक्षों में कई दौर की वार्ता हुई परन्तु किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके। इसके लिए पाकिस्तान की हठधर्मी ही मुख्य रूप से जिम्मेदार थी। तभी अचानक 2 जुलाई को लंच से पहले ही दोनों पक्षों में समझौता हो गया, जबकि भुट्टो को उसी दिन वापस जाना था। इस समझौते पर पाकिस्तान की ओर से भुट्टो और भारत की ओर से इन्दिरा गाँधी ने हस्ताक्षर किये थे। यह समझना कठिन नहीं है कि यह समझौता करने के लिए भारत के ऊपर किसी बड़ी विदेशी ताकत का दबाव था।



मुख्य समाधान

                 शिमला समझौते को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली हुई हैं।इसमे मुख्य रूप से दो बातें थी। पहली यह है कि दोनो देश अपने द्विपक्षीय मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझाएंगे, जिसमे किसी तीसरे देश अथवा पक्ष का कोई दखल नही होगा और दूसरी यह कि जम्मू कश्मीर की युद्ध विराम रेखा को नियंत्रण रेखा के रूप में मान्यता दी जाए। हालांकि एम के काव की किताब एन आउटसाइडर एव्रीवेयर का खुलासा है कि नियंत्रण रेखा को लेकर इंदिरा गांधी भुट्टो से लिखित आश्वासन चाहती थी, हालांकि यह सम्भव नही हो सका। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन भी इसी समझौते की देन है। अपना सब कुछ लेकर पाकिस्तान ने एक थोथा-सा आश्वासन भारत को दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर सहित जितने भी विवाद हैं, उनका समाधान आपसी बातचीत से किया जाएगा और उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर नहीं उठाया जाएगा। इस समझौते में भारत और पाकिस्तान के बीच यह भी तय हुआ था कि 17 दिसम्बर 1971 अर्थात् पाकिस्तानी सेनाओं के आत्मसमर्पण के बाद दोनों देशों की सेनायें जिस स्थिति में थीं, उस रेखा को ”वास्तविक नियंत्रण रेखा“ माना जाएगा और कोई भी पक्ष अपनी ओर से इस रेखा को बदलने या उसका उल्लंघन करने की कोशिश नहीं करेगा। 


  

         आलोचकों की माने, तो पाकिस्तान की तरफ से बार-बार इसका उल्लंघन हुआ है।1991 में कारगिल युद्ध इसका उदाहरण है।यह भी निर्विवाद है कि आज अगर भारत और पाकिस्तान मिल बैठकर विवादित मसलो पर बात कर रहे हैं, तो इसमें शिमला समझौता की बड़ी भूमिका है।

     
Shimla Agreement (शिमला समझौता) Shimla Agreement (शिमला समझौता) Reviewed by Akash on April 28, 2020 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.